– कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा की संकल्पना को युवाओं का जबरदस्त प्रतिसाद

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– 50 विजेताओं को ₹10-10 लाख के कार्यादेश;

नवाचारों के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए ₹5 करोड़ की निधि

जा. न्यूज़ संवाददाता 

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में और  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के माध्यम से आयोजित ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ नामक बहुराज्यीय नवाचार प्रतियोगिता को विद्यार्थियों, युवाओं, नवउद्यमियों और शोधकर्ताओं का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला है।

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने मंगलवार को बताया कि  महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव इन केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल करने वाले महाराष्ट्र ज़ोन से इस प्रतियोगिता के लिए 31 अक्टूबर की मध्यरात्रि को आवेदन प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस प्रतियोगिता के लिए कुल 1 लाख 7 हजार 603 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। युवाओं के नवाचारों को मंच उपलब्ध कराने वाली इस प्रतियोगिता ने विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

मंत्री लोढा ने बताया कि महाराष्ट्र ज़ोन से इस प्रतियोगिता के लिए 1 लाख 7 हजार 603 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें 79 हजार 162 टीमों ने भाग लिया है, जबकि 32 हजार 298 प्रतिभागियों ने अपनी प्रोफाइल पूरी की है। इसके अलावा, 6 हजार 192 महिलाओं और 18 वर्ष से कम आयु के 4 हजार 549 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। सामान्य वर्ग से 21 हजार 550 प्रतिभागियों ने सहभागिता दर्ज कराई है तथा प्रतिभागियों द्वारा कुल 16 हजार 57 नवाचारपूर्ण अवधारणाएं प्रस्तुत की गई हैं।

10 प्रमुख क्षेत्रों की समस्याओं के खोजे जाएंगे नावचारपूर्ण समाधान

इस प्रतियोगिता के माध्यम से कृषि, कानून एवं व्यवस्था, महिला एवं बाल कल्याण, शहरी विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं, रक्षा, सतत विकास (ऊर्जा, जलवायु एवं संबंधित क्षेत्र), बुनियादी ढांचा एवं परिवहन, उभरती प्रौद्योगिकियां (कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन एवं अन्य तकनीकें) तथा शिक्षा एवं रोजगार क्षमता जैसे 10 प्रमुख क्षेत्रों की समस्याओं के लिए नवाचारपूर्ण समाधान खोजे जाएंगे। प्रत्येक प्रमुख क्षेत्र के अंतर्गत पांच उपक्षेत्र शामिल हैं। इस प्रकार कुल 50 उपक्षेत्रों में से विजेताओं का चयन किया जाएगा।

50 विजेताओं को मिलेंगे 10 लाख रुपए के कार्यादेश

कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने बताया कि इस प्रतियोगिता के 50 विजेताओं को प्रत्येक को 10 लाख रुपये के कार्यादेश प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए कुल 5 करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे युवाओं के विचार केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से लागू करने का अवसर भी मिलेगा। युवाओं की रचनात्मकता को उचित मंच प्रदान करने, नवउद्यमियों को प्रोत्साहित करने और समाजोपयोगी नवाचारों के क्रियान्वयन को गति देने के उद्देश्य से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है, ऐसी जानकारी कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने दी।

महाराष्ट्र को इनोवेशन कैपिटल बनाने का प्रयास

मंत्री लोढा ने कहा कि ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ को मिला उत्साहजनक प्रतिसाद युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशील क्षमता का प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र को देश की ‘इनोवेशन कैपिटल’ बनाने की दिशा में हम कार्यरत हैं। इस प्रतियोगिता के 50 विजेताओं को प्रत्येक को 10 लाख रुपये के कार्यादेश, इस प्रकार कुल 5 करोड़ रुपये के कार्यादेश प्रदान किए जाएंगे। युवाओं के विचारों को आर्थिक सहयोग देकर उनके वास्तविक क्रियान्वयन का अवसर उपलब्ध कराना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले उद्यमी और नवाचारकर्ता बनें, इसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं, ऐसी जानकारी मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने दी।

राज्य के युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में सक्षम बनाने के लिए कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के माध्यम से विभिन्न महत्वपूर्ण पहलें चलाई जा रही हैं।

1. सीएम महाफंड योजना :

महाराष्ट्र को नवाचार की राजधानी बनाने के उद्देश्य से इस योजना के अंतर्गत 30 लाख नवाचारशील युवाओं में से चयनित एक लाख युवाओं को 5 से 10 लाख रुपये तक का बिना किसी संपार्श्विक गारंटी (कोलैटरल फ्री) वाला और अत्यंत कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही नवोदित उद्यमियों और नवाचारशील युवाओं को अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।

2. अल्पकालीन पाठ्यक्रम (शॉर्ट टर्म कोर्सेस) :

युवाओं को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में विभिन्न अल्पकालीन पाठ्यक्रम निःशुल्क पढ़ाए जा रहे हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक (EV), सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग एवं तकनीशियन पाठ्यक्रम तथा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जैसे आधुनिक रोजगारोन्मुख कौशल शामिल हैं।

3. नए युग के पाठ्यक्रम (न्यू एज कोर्सेस) :

सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से आधुनिक तकनीक पर आधारित नए युग के पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इनमें सोलर टेक्नीशियन (इलेक्ट्रिकल), इलेक्ट्रिक वाहन मैकेनिक, ड्रोन टेक्नीशियन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन (3डी प्रिंटिंग), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग असिस्टेंट तथा इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स एवं डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से संबंधित कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा।

4. राज्यस्तरीय समन्वय संस्था :

राज्य में नवाचार के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए राज्यस्तरीय समन्वय संस्थाओं की स्थापना की जा रही है। इसके माध्यम से संबंधित संस्थाओं के कार्यों को व्यापक दिशा देना, आपसी सहयोग बढ़ाना और राज्य की नवाचार पारिस्थितिकी प्रणाली (इनोवेशन इकोसिस्टम) को अधिक सशक्त बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

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वापी में आयोजित भव्य कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील की

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दीपावली और नववर्ष के पावन अवसर से पहले गुजरात के वलसाड जिले को राज्य सरकार की ओर से विकास कार्यों की बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 3 नवंबर 2026 को वापी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिले के लिए लगभग 441 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का ई-लोकार्पण एवं ई-खातमुहूर्त किया। इन परियोजनाओं से जिले में आधारभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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150 बेड की आधुनिक सरकारी अस्पताल से मिलेगी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूती

इस कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में वापी में 150 बेड की आधुनिक सुविधाओं से युक्त सरकारी अस्पताल का लोकार्पण शामिल रहा। इस अस्पताल के शुरू होने से वापी शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिक परिवारों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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अब गंभीर बीमारियों के उपचार और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए मरीजों को दूसरे बड़े शहरों की ओर जाने की परेशानी कम करने में सहायता मिल सकती है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की इस यात्रा और विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास से वलसाड जिले में विकास की नई उम्मीद जगी है। आधुनिक अस्पताल, नया जिला पंचायत भवन और अन्य बुनियादी परियोजनाएं आने वाले समय में जिले की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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37.50 करोड़ की लागत से बना नया जिला पंचायत भवन

वलसाड जिले को प्रशासनिक सुविधाओं के क्षेत्र में भी बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 37.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित छह मंजिला नए जिला पंचायत भवन का उद्घाटन किया।

इस आधुनिक भवन में सरकारी कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न विभागों और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इससे जिले के नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होने की उम्मीद है।

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वलसाड जिले के औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से आम नागरिकों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

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हर्ष संघवी की व्यापारियों और नागरिकों से विशेष अपील

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की ओर से दीपावली के अवसर पर स्थानीय व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों की खरीदारी करते समय स्थानीय दुकानदारों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता दें। स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने से छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।

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दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर यदि नागरिक स्थानीय दुकानों से खरीदारी करते हैं, तो इसका सीधा लाभ छोटे व्यापारियों, कुम्हारों, हस्तशिल्पकारों और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं तक पहुंच सकता है।

विकास के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संदेश

वलसाड जिला दक्षिण गुजरात का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र है। वापी की औद्योगिक पहचान, वलसाड का व्यापारिक बाजार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियां जिले के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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ऐसे में 441 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के साथ स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने की अपील को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दीपावली पर विकास और समृद्धि की उम्मीद

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की इस यात्रा और विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास से वलसाड जिले में विकास की नई उम्मीद जगी है। आधुनिक अस्पताल, नया जिला पंचायत भवन और अन्य बुनियादी परियोजनाएं आने वाले समय में जिले की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

दीपावली से पहले मिली इस विकास सौगात के साथ स्थानीय व्यापारियों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इन परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन ही इनका वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचाने में निर्णायक होगा।

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सरकार की ओर से आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और नागरिकों की ओर से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दिए जाने से विकास की प्रक्रिया को दोहरा लाभ मिल सकता है।

धनंजय सिंह और अवध ओझा की पहल से पूर्वांचल के युवाओं को मिलेगा नई दिशा का अवसर

जौनपुर से शुरू होने वाली यह पहल यदि सफलतापूर्वक धरातल पर उतरती है, तो निश्चित रूप से पूर्वांचल के युवाओं के लिए सिविल सेवा के सपनों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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जौनपुर,

अब जौनपुर और पूर्वांचल के युवाओं को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी के लिए दिल्ली, प्रयागराज और लखनऊ जैसे बड़े शहरों का रुख करने की मजबूरी कम हो सकती है। जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह और देशभर में अपनी शिक्षण शैली के लिए चर्चित शिक्षक अवध ओझा ने मिलकर जौनपुर में UPSC की तैयारी के लिए एक आधुनिक शैक्षणिक संस्थान खोलने की घोषणा की है।

30 अक्टूबर को जौनपुर में आयोजित घोषणा कार्यक्रम के दौरान इस पहल की जानकारी साझा की गई। बताया गया कि प्रस्तावित संस्थान में सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की योजना है।

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आधुनिक लाइब्रेरी और अनुभवी शिक्षकों की मिलेगी मेंटरशिप

इस संस्थान को विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित करने की योजना है। यहां UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, आधुनिक लाइब्रेरी, अध्ययन के लिए बेहतर माहौल और अनुभवी शिक्षकों की मेंटरशिप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल का विशेष उद्देश्य पूर्वांचल के उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जिन्हें आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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पूर्वांचल की प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर

पूर्वांचल में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन, बेहतर संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की। ऐसे में जौनपुर में UPSC की तैयारी के लिए आधुनिक संस्थान खोलने की यह पहल क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।

इससे जौनपुर के साथ-साथ आजमगढ़, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही, मऊ, चंदौली और आसपास के अन्य जिलों के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

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स्थानीय स्तर पर प्रतियोगी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में पहल

यदि प्रस्तावित संस्थान अपनी योजनाओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध करा पाता है, तो इससे पूर्वांचल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शैक्षणिक माहौल को मजबूती मिल सकती है। साथ ही विद्यार्थियों को अपने परिवार के करीब रहकर पढ़ाई करने और यात्रा तथा रहने के अतिरिक्त खर्च को कम करने का अवसर भी मिल सकता है।

धनंजय सिंह और अवध ओझा की इस संयुक्त पहल से क्षेत्र के युवाओं में नई उम्मीद जगी है। अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की निगाहें संस्थान की शुरुआत, प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और उपलब्ध होने वाली सुविधाओं से जुड़ी आगामी घोषणाओं पर रहेंगी।

जौनपुर से शुरू होने वाली यह पहल यदि सफलतापूर्वक धरातल पर उतरती है, तो निश्चित रूप से पूर्वांचल के युवाओं के लिए सिविल सेवा के सपनों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

95 साल बाद फिर होगी जातिगत जनगणना, 25 जनवरी 2027 से शुरू होगा दूसरा चरण; लोगों से पूछे जाएंगे 40 सवाल

नई दिल्ली। देश में लगभग 95 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर जातिगत जनगणना होने जा रही है। वर्ष 1931 के बाद पहली बार जनगणना में जातियों से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। केंद्र सरकार की जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच यह फैसला सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से देश की विभिन्न जातियों की वास्तविक संख्या, सामाजिक स्थिति और जनसांख्यिकीय जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा।

25 जनवरी 2027 से शुरू होगा जनगणना का दूसरा चरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनगणना 2027 का दूसरा चरण 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलने का कार्यक्रम बताया गया है। इस दौरान नागरिकों से लगभग 40 सवाल पूछे जाएंगे। इन सवालों के माध्यम से परिवार, आवास, सामाजिक स्थिति और अन्य जरूरी जानकारियां एकत्र की जाएंगी।

जनगणना की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए इस बार डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और सटीक तरीके से एकत्र करना है।

पहली बार होगी डिजिटल जनगणना

इस बार की जनगणना को देश की पहली डिजिटल जनगणना के रूप में तैयार किया जा रहा है। नागरिकों को 10 से 24 जनवरी 2027 तक सरकारी पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा दिए जाने की बात कही गई है।

इस प्रक्रिया को स्व-गणना (Self Enumeration) कहा जाता है। इसके तहत लोग घर बैठे ऑनलाइन अपनी और अपने परिवार की जानकारी भर सकेंगे।

ऑनलाइन जानकारी दर्ज होने के बाद सरकारी प्रगणक घर-घर पहुंचकर विवरण का सत्यापन करेंगे और आवश्यक जानकारियां एकत्र करेंगे। इससे जनगणना की प्रक्रिया को आसान बनाने और डेटा की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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जनगणना की प्रक्रिया तीन चरणों में होगी पूरी

जनगणना को तीन प्रमुख चरणों में पूरा करने की योजना है।

1. पहला चरण: मकानों और आवासीय सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र करना।

2. दूसरा चरण: परिवारों और नागरिकों से संबंधित जानकारी जुटाना, जिसमें जातिगत विवरण भी शामिल होगा।

3. तीसरा चरण: प्राप्त आंकड़ों की जांच और जरूरत के अनुसार पुनरीक्षण करना, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति जनगणना से वंचित न रह जाए।

इस प्रक्रिया में प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। इसके लिए मोबाइल एप और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

किन राज्यों में फिलहाल अलग रखी गई है जनगणना की प्रक्रिया?

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पांच राज्यों और क्षेत्रों में चुनाव, सुरक्षा तथा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जनगणना की समय-सारणी अलग रखी गई है।

इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर का उल्लेख किया गया है। मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण सामान्य स्थिति प्रभावित होने का भी हवाला दिया गया है।

वहीं जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनवरी-फरवरी के दौरान जनगणना कराना कठिन हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों में सितंबर-अक्टूबर के दौरान जनगणना कराने की संभावना जताई गई है।

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लगभग 30 लाख कर्मचारियों की ली जाएगी मदद

इतने बड़े स्तर पर जनगणना कराने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होगी। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक इस कार्य में लगाए जा सकते हैं।

ये कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी प्राप्त करेंगे और उसे डिजिटल माध्यम से दर्ज करेंगे। मोबाइल एप और टैबलेट की मदद से आंकड़ों को एकत्र करने की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाया जाएगा।

जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार का बड़ा बजट

जनगणना जैसे व्यापक राष्ट्रीय कार्य को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने भी बड़ी राशि का प्रावधान किया है। समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

इस बजट का उपयोग जनगणना की तैयारियों, कर्मचारियों की तैनाती, तकनीकी संसाधनों, डिजिटल व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किया जाना है।

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जातिगत जनगणना क्यों है महत्वपूर्ण?

जातिगत जनगणना को देश की सामाजिक व्यवस्था और नीतिगत निर्णयों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विभिन्न जातियों की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति से जुड़े आंकड़े उपलब्ध हो सकते हैं।

इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और विकास से संबंधित नीतियां तैयार करने में किया जा सकता है।

हालांकि, जातिगत आंकड़ों का वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया जाएगा, यह सरकार की नीतियों और संबंधित आधिकारिक निर्णयों पर निर्भर करेगा।

नागरिकों को क्या करना चाहिए?

जनगणना के दौरान नागरिकों को अपनी और अपने परिवार की सही जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। यदि स्व-गणना की सुविधा का उपयोग किया जाता है, तो सभी विवरण सावधानीपूर्वक भरने चाहिए।

इसके अलावा, घर पर आने वाले अधिकृत जनगणना कर्मचारियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने से पहले संबंधित कर्मचारी की पहचान सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

2027 की जनगणना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया साबित हो सकती है। डिजिटल तकनीक और जातिगत आंकड़ों को शामिल करने की तैयारी के कारण इस बार की जनगणना पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। इससे देश की सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त होने की उम्मीद है।

वापी,

फेलोशिप मिशन स्कूल, वापी में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को भारत के ‘लोह पुरुष’ के रूप में प्रसिद्ध सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म जयंती बड़े उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। यह आयोजन सरदार पटेल के भारत के एकीकरण में योगदान और अखंड भारत के उनके दृष्टिकोण को याद करने के उद्देश्य से किया गया। सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।

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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री एवं श्रीमती मुकुंद भावसार, श्री मेहुल व्यास, स्कूल के प्रबंध निदेशक श्री सी. वी. मैथ्यू तथा प्रधानाचार्य श्री संदीप मराठा उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और छात्रों को एकता, नेतृत्व तथा राष्ट्रीय अखंडता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, संघर्ष तथा ऐतिहासिक योगदान को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। इसके अलावा, भारत की विविध संस्कृतियों, परंपराओं, वेशभूषाओं और एकता की भावना को दर्शाता हुआ एक आकर्षक फैशन शो भी आयोजित किया गया।

इस प्रस्तुति के माध्यम से छात्रों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और ‘विविधता में एकता’ के संदेश को जीवंत रूप दिया। राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य भी देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।

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अतिथियों ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में छात्रों को सरदार पटेल के जीवन से दृढ़ संकल्प, अनुशासन, साहस और एकता जैसे गुणों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्र सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम से छात्रों को राष्ट्रीय एकता के महत्व और देश के भावी नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिला। सरदार पटेल को उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के कारण ‘लोह पुरुष’ कहा जाता है।

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कार्यक्रम का संचालन विभाग के उप-प्रधानाचार्य श्री सैम मैथ्यूज तथा मिडिल स्कूल के समर्पित शिक्षकों द्वारा किया गया। उनके सुव्यवस्थित आयोजन, सामूहिक प्रयासों और निष्ठापूर्ण सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का समापन देशभक्ति और कृतज्ञता की भावना के साथ हुआ, जिसने सभी के मन में राष्ट्रीय एकता और ‘विविधता में एकता’ का गौरव और मजबूत किया। यह उत्सव केवल महान राष्ट्रीय नेता को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं था, बल्कि उनके शाश्वत संदेश—“एकता ही राष्ट्र की सच्ची शक्ति है”—को याद दिलाने का भी अवसर था।

सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश की एकता के लिए अथक प्रयास किए और विभिन्न रियासतों को भारत संघ में एकजुट करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में एक बार फिर महत्वपूर्ण बदलाव किया है। बोर्ड ने 29 अक्टूबर को जारी नए परिपत्र में तीन प्रस्तावित विषयों को फिलहाल पाठ्यक्रम से हटाने का फैसला लिया है। इन विषयों में ‘समाज में व्यक्ति’, ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग’ और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)’ शामिल हैं।

CBSE के इस फैसले के बाद एक बार फिर स्कूली शिक्षा की नई व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि पिछले सात महीनों में बोर्ड छठी बार पढ़ाई की योजना में बदलाव कर चुका है। इससे विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों के सामने पाठ्यक्रम और नई शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

कक्षा 9 के पाठ्यक्रम से फिलहाल हटाए गए तीन विषय

बोर्ड की ओर से जारी नए परिपत्र के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित तीन विषयों को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा।

इनमें समाज में व्यक्ति, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं। इन विषयों को नई शैक्षणिक व्यवस्था के तहत शामिल करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब इन्हें फिलहाल हटाने का निर्णय लिया गया है।

यह बदलाव खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वर्ष 2027-28 में कक्षा 10 में पहुंचेंगे।

2027-28 में कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में भी होगा बदलाव

CBSE के अनुसार, वर्तमान कक्षा 9 के विद्यार्थी जब शैक्षणिक सत्र 2027-28 में कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब उनके पाठ्यक्रम में पर्यावरण शिक्षा शामिल नहीं होगी।

हालांकि, वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर इस बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी यह व्यवस्था आने वाले शैक्षणिक सत्रों में लागू होने वाली नई योजना से संबंधित है।

सात महीने में छठी बार बदली पढ़ाई की योजना

CBSE की ओर से पिछले सात महीनों के दौरान पाठ्यक्रम और नई शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों में तीन भाषाओं की अनिवार्यता, तीसरी भाषा के चयन, उसके मूल्यांकन और नए विषयों को लागू करने से जुड़े फैसले शामिल रहे हैं।

बार-बार होने वाले इन बदलावों का असर स्कूलों की शैक्षणिक योजना, शिक्षकों की तैयारी और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। ऐसे में स्कूलों को बोर्ड की ओर से जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी व्यवस्था तैयार करनी होगी।

जानिए, कब-कब हुए बड़े बदलाव

– 2 अप्रैल 2026: कक्षा 9 और 10 के लिए नई पढ़ाई योजना तथा तीन भाषा नीति जारी की गई।

– 9 अप्रैल 2026: तीसरी भाषा को कक्षा 9 में वर्ष 2029-30 तक लागू नहीं करने की छूट दी गई।

– 15 मई 2026: 1 जुलाई से कक्षा 9 में तीन भाषाओं को अनिवार्य करने का फैसला किया गया।

– 29 जून 2026: विद्यार्थियों को तीसरी भारतीय भाषा चुनने की छूट दी गई।

– 2 जुलाई 2026: तीसरी भाषा के मूल्यांकन के लिए सामग्री जारी की गई।

– 10 जुलाई 2026: भाषा नीति लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए।

– 29 अक्टूबर 2026: तीन प्रस्तावित विषयों को पाठ्यक्रम से हटाने का निर्णय लिया गया।

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विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए क्या है इसका मतलब?

CBSE के इस फैसले के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने पाठ्यक्रम को लेकर नवीनतम जानकारी रखना जरूरी होगा। खासतौर पर कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्कूल की ओर से उपलब्ध कराए गए नए पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई करनी चाहिए।

अभिभावकों को भी पुराने पाठ्यक्रम या पहले जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर किताबें और अध्ययन सामग्री खरीदने के बजाय स्कूल से नए बदलावों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे विद्यार्थियों को संशोधित पाठ्यक्रम की सही जानकारी दें, ताकि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो।

नई शिक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या?

नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, बहुभाषी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों को शामिल करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए तैयार करना है।

गुजरात का चांदनकी गांव ,एक ऐसा गांव, जहां बुजुर्ग अकेले नहीं रहते, जहां हर घर उनका अपना है और पूरा गांव मिलकर निभाता है परिवार की जिम्मेदारी। गुजरात के चांदनकी गांव की यह अनूठी पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

आज के आधुनिक दौर में जहां एक ओर शहरों में बुजुर्ग माता-पिता अकेलेपन और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गुजरात का एक गांव ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो हमें अपने सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों की याद दिलाती है।

अक्सर उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों को शारीरिक परेशानियों के अलावा मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों और अकेलेपन से भी जूझना पड़ता है। कई परिवारों में बच्चे नौकरी या बेहतर भविष्य की तलाश में दूसरे शहरों और विदेशों में बस जाते हैं। पीछे रह जाते हैं माता-पिता, जिनके लिए घर तो होता है, लेकिन कई बार अपनों का साथ नहीं होता।

ऐसे समय में गुजरात के चांदनकी गांव ने यह साबित किया है कि बुजुर्गों की देखभाल के लिए केवल वृद्धाश्रम ही एक विकल्प नहीं है। यदि समाज चाहे तो पूरा गांव भी एक बड़ा परिवार बन सकता है।

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260 घरों का गांव, करीब 100 बुजुर्ग और सबके लिए एक परिवार जैसा माहौल

गुजरात का चांदनकी गांव सामुदायिक जीवन की एक अनूठी तस्वीर पेश करता है। इस गांव में करीब 260 घर हैं और लगभग 100 बुजुर्ग रहते हैं। यहां बुजुर्गों को अकेला छोड़ने के बजाय पूरा गांव मिलकर उनकी देखभाल और जरूरतों का ध्यान रखता है।

इस गांव की सबसे खास बात यह है कि बुजुर्गों के लिए अलग-थलग जीवन नहीं, बल्कि परिवार जैसा वातावरण तैयार किया गया है। गांव में सामूहिक भोजन की व्यवस्था है, जहां बुजुर्ग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। भोजन की जिम्मेदारी भी सामूहिक रूप से निभाई जाती है और इसके लिए गांव में एक व्यवस्था बनाई गई है।

मंदिर में भजन-कीर्तन और साथ बैठने से दूर होता है अकेलापन

गांव में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के सामाजिक और मानसिक जीवन का भी ध्यान रखा जाता है। शाम के समय मंदिर में सभी बुजुर्ग एकत्र होते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।

इससे उन्हें एक-दूसरे के साथ समय बिताने, अपनी बातें साझा करने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने का अवसर मिलता है। यहां बुजुर्ग खुद को किसी पर बोझ नहीं समझते, बल्कि गांव के सम्मानित और महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में जीवन बिताते हैं।

बच्चों के विदेश में रहने पर भी माता-पिता को नहीं होती चिंता

इस गांव की व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जिन बुजुर्गों के बच्चे देश के दूसरे शहरों या विदेशों में रहते हैं, उन्हें भी माता-पिता की चिंता कम रहती है। पूरा गांव उनके साथ खड़ा रहता है।

किसी को दवा की जरूरत हो, किसी को अस्पताल जाना हो या किसी अन्य सहायता की आवश्यकता हो, तो गांव के लोग मिलकर मदद के लिए आगे आते हैं।

यहां सामाजिक जुड़ाव इतना मजबूत है कि बुजुर्गों को अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में अकेलेपन का सामना नहीं करना पड़ता।

वृद्धाश्रम नहीं, अपनापन और सम्मान है असली जरूरत

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दरअसल, बुजुर्गों को केवल रहने के लिए जगह नहीं चाहिए, उन्हें सम्मान, अपनापन, बातचीत करने वाला कोई अपना और जरूरत के समय मदद करने वाले हाथ चाहिए।

जिस माता-पिता ने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दी, उम्र के उस पड़ाव पर उन्हें अकेलापन नहीं, बल्कि परिवार और समाज का साथ मिलना चाहिए।

पूरे देश के गांवों और शहरों के लिए प्रेरणा

चांदनकी गांव का मॉडल बताता है कि सामूहिक इच्छाशक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी से बुजुर्गों के जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि हर जगह बड़े भवन या महंगे वृद्धाश्रम बनाए जाएं। जरूरत है तो बस संवेदनशील सोच, आपसी सहयोग और जिम्मेदारी निभाने की भावना की।

यदि देश के दूसरे गांव और शहर भी इस तरह की सामुदायिक व्यवस्था विकसित करें, तो हजारों बुजुर्गों को सम्मानजनक और खुशहाल जीवन मिल सकता है।

सबसे बड़ा सवाल हम सभी के सामने है -जिस समाज में बुजुर्गों ने अपनी पूरी जिंदगी अगली पीढ़ी को बेहतर बनाने में लगा दी, क्या उस समाज की जिम्मेदारी नहीं कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर उन्हें अकेला न छोड़े?

चांदनकी गांव हमें एक खूबसूरत संदेश देता है—बुजुर्गों को सिर्फ छत नहीं, अपनों का साथ चाहिए। उन्हें वृद्धाश्रम नहीं, ऐसा समाज चाहिए जहां हर व्यक्ति उन्हें अपना समझे।

क्योंकि जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वही समाज वास्तव में सभ्य, संवेदनशील और समृद्ध कहलाता है।

जागरण डेस्क,

त्योहारों का मौसम आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन बदलते दौर में अब मिठाइयों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। पहले जहां दिवाली पर पारंपरिक मिठाइयां और उपहार दिए जाते थे, वहीं अब बाजार में महंगी, आकर्षक और अनोखे डिजाइन वाली प्रीमियम मिठाइयों का चलन बढ़ रहा है। तकनीक, आधुनिक प्रयोग और अंतरराष्ट्रीय स्वाद के मेल ने पारंपरिक मिठाइयों को लग्जरी गिफ्ट का रूप दे दिया है।

मिठाई बाजार में अब ऐसी वैरायटी सामने आ रही हैं, जिनकी कीमत सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। कुछ खास मिठाइयों की कीमत एक लाख रुपये प्रति किलो से भी अधिक पहुंच गई है। इनमें सोने की भस्म, केसर, मेवे और खाने योग्य सोने की परत का इस्तेमाल किया जा रहा है।

₹1.11 लाख किलो की खास मिठाई बनी चर्चा का विषय

जयपुर के एक लग्जरी मिठाई ब्रांड की खास ‘स्वर्ण प्रसादम’ मिठाई इन दिनों आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसे पाइन नट्स, केसर और खाने योग्य सोने की भस्म से तैयार किया जाता है। इसकी कीमत करीब 1.11 लाख रुपये प्रति किलो बताई गई है। एक पीस की कीमत लगभग 3,000 रुपये तक है।

इसी तरह बाजार में सोने और चांदी की भस्म से तैयार की जाने वाली मिठाइयां भी प्रीमियम श्रेणी में अपनी जगह बना रही हैं।

जापानी तकनीक और भारतीय स्वाद का अनोखा संगम

मिठाई बनाने वाले कारीगर अब पारंपरिक भारतीय स्वाद को आधुनिक तकनीक और जापानी डिजाइन के साथ नया रूप दे रहे हैं। जापानी कारीगरी से प्रेरित रंग-बिरंगी मिठाइयां ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। इनमें पारंपरिक सामग्री के साथ आधुनिक सजावट और आकर्षक पैकेजिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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डोडा बर्फी को मिला मॉडर्न पाई का रूप

विदेशों में भी भारतीय मिठाइयों के साथ नए प्रयोग किए जा रहे हैं। न्यूयॉर्क में भारतीय मिठाई डोडा बर्फी को मॉडर्न पाई के रूप में पेश किया गया है। पारंपरिक स्वाद को नए अंदाज में परोसने का यह प्रयोग खासा आकर्षक है। इसकी कीमत करीब 75 डॉलर यानी लगभग 7,127 रुपये से शुरू बताई गई है।

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सोने की परत, केसर, मेवे और विदेशी फ्लेवर से तैयार हो रही प्रीमियम मिठाइयां। दिवाली पर लग्जरी मिठाई गिफ्टिंग का बढ़ता चलन।

24 कैरेट सोने की परत वाली काजू कतली

पारंपरिक भारतीय मिठाइयों में भी लग्जरी का तड़का लगाया जा रहा है। 24 कैरेट सोने की परत वाली काजू कतली इसका उदाहरण है। इसमें बेहतरीन काजू और खाने योग्य सोने की परत का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके 30 पीस वाले डिब्बे की कीमत करीब 21,000 रुपये है।

मिठाई बाजार में बिस्कॉफ बर्फी, चॉकलेट, कॉफी और अन्य विदेशी फ्लेवर के प्रयोग भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पारंपरिक भारतीय मिठाइयों को विदेशी स्वाद और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। इससे मिठाई कारोबार में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

मिठाई अब सिर्फ स्वाद नहीं, स्टेटस और लग्जरी का प्रतीक

बदलती जीवनशैली और उपहार देने के नए तरीकों ने मिठाई बाजार को नया आयाम दिया है। अब ग्राहक सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि मिठाई की बनावट, डिजाइन, पैकेजिंग और उसकी खासियत को भी महत्व दे रहे हैं। यही वजह है कि प्रीमियम मिठाइयां महंगे उपहारों के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।

कुल मिलाकर, तकनीक और रचनात्मकता ने पारंपरिक मिठाइयों को आधुनिक बाजार में नई पहचान दी है। आने वाले समय में मिठाई कारोबार में ऐसे नए प्रयोग और भी देखने को मिल सकते हैं।

 

– छठ पूजा समितियों के सुझावों पर महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े की बैठक में चर्चा

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– श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा की अपील

– कृत्रिम तालाब, पीने का पानी, शौचालय और विद्युत रोशनी की व्यवस्था की जाएगी

जा. न्यूज़ संवाददाता

मुंबई। मुंबई शहर और उपनगरों में छठ पूजा का उत्सव इस वर्ष भी उत्साहपूर्वक और सुचारू रूप से संपन्न हो, इसके लिए मुंबई महानगरपालिका को विशेष नियोजन करना चाहिए। इसी उद्देश्य से छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए गुरुवार को महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में 20 से अधिक छठ पूजा समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। उन्होंने विभिन्न सुझाव और माँगें रखीं। इसके अनुसार, आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने का आश्वासन महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े ने दिया।

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मुंबई के मढ़-मार्वे, जुहू चौपाटी, गिरगाँव चौपाटी, दादर चौपाटी और बाणगंगा जैसे स्थानों पर छठ पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। विशेष रूप से जुहू चौपाटी पर लगभग पाँच लाख श्रद्धालु छठ पूजा के लिए उपस्थित रहते हैं, इसलिए वहाँ पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग बैठक में की गई। सार्वजनिक शौचालय, कपड़े बदलने के लिए अलग कमरे, पीने का पानी तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करने पर समितियों के प्रतिनिधियों ने जोर दिया।

मुंबई के विभिन्न स्थानों पर आवश्यकतानुसार कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया जाए, छठ पूजा से कुछ दिन पहले सभी चौपाटियों की सफाई की जाए और गिरगाँव चौपाटी पर पूजा-अर्चना के लिए मंच बनाया जाए, ऐसी माँगें भी की गईं। प्रतिनिधियों ने यह अपेक्षा भी व्यक्त की कि महानगरपालिका छठ पूजा के लिए आवश्यक सामग्री और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराए।

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छठ पूजा के आयोजन के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु महानगरपालिका के सभी संबंधित विभागीय कार्यालयों में सिंगल विंडो योजना लागू करने के संबंध में निर्देश दिए जाएँगे। साथ ही, प्रत्येक स्थान पर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, ऐसा महानगरपालिका की ओर से बताया गया। आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कृत्रिम तालाब बनाने के साथ-साथ अग्निशमन दल की व्यवस्था, पीने का पानी, सीसीटीवी प्रणाली, विद्युत रोशनी, चलित शौचालय और कपड़े बदलने के लिए कमरे उपलब्ध कराने का आश्वासन भी महानगरपालिका ने दिया।

मुंबई महानगरपालिका अन्य त्योहारों के अवसर पर जिस प्रकार आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, उसी तर्ज पर छठ पूजा के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा, ऐसा आश्वासन महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े ने दिया।IMG 20261029 WA0021

इस अवसर पर भाजपा मुंबई महामंत्री आचार्य पवन त्रिपाठी, नगरसेवक बाला तावडे, महानगरपालिका के अधिकारी और समितियों के प्रतिनिधियों सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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छठ पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं को असुविधा न हो

छठ पूजा आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। मुंबई महानगरपालिका को छठ पूजा स्थलों पर कृत्रिम तालाब, स्वच्छता, पीने का पानी, शौचालय आदि सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए। साथ ही, सिंगल विंडो योजना के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाकर श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा से बचाना चाहिए। मुंबई की समावेशी संस्कृति को बनाए रखते हुए छठ पूजा का उत्सव निश्चित रूप से सुरक्षित और उत्साहपूर्वक संपन्न होगा।

— मंगलप्रभात लोढ़ा, कैबिनेट मंत्री।
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30 अक्टूबर तक आवेदन करने का अवसर; विद्यार्थियों से लेकर स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं तक सभी ले सकेंगे भाग

 राष्ट्रीय सुरक्षा, शहरी पलायन और श्रमिकों को गर्मी से बचाने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नवाचारों को मिल रहा उत्स्फूर्त प्रतिसाद

जा. न्यूज़ संवाददाता

मुंबई। केंद्रीय कौशल विकास विभाग द्वारा आयोजित बहुराज्यीय नवाचार प्रतियोगिता ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ को उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है। महाराष्ट्र जोन से इस प्रतियोगिता में भाग लेने वालों की संख्या 65 हजार से अधिक हो गई है। बढ़ती भागीदारी को देखते हुए प्रतियोगिता के लिए 30 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करने का अवसर उपलब्ध है।

विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक समस्याओं के नवीन एवं व्यावहारिक समाधान खोजना इस प्रतियोगिता का प्रमुख उद्देश्य है। राष्ट्रीय सुरक्षा, शहरी पलायन और श्रमिकों को गर्मी से बचाने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नवाचारों को प्रतिभागियों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है।

‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ प्रतियोगिता के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष संभावित खतरे (जैसे सोशल मीडिया का दुरुपयोग और अवैध विदेशी वित्तपोषण), शहरी आबादी में बदलाव एवं पलायन, जनसंख्या के पलायन संबंधी प्रवाहों पर निगरानी, मेहनतकश श्रमिकों को गर्मी से बचाने तथा संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों, व्यावसायिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों को एक मंच पर लाने जैसे विषयों पर नवीन विचार प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इन क्षेत्रों में भी प्रतिभागियों की ओर से उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है।

अब तक महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़ तथा केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव सहित महाराष्ट्र जोन से 65 हजार से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। इनमें 48,680 टीमों ने भाग लिया है। इसके अलावा, 3,787 महिलाओं और 18 वर्ष से कम आयु के 2,044 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। सामान्य वर्ग से 12,604 पंजीकरण हुए हैं, जबकि कुल 7,952 विचार प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 सितंबर से शुरू हुई है। नवप्रवर्तक, विद्यार्थी, विद्यार्थी समूह, शोधकर्ता, प्राध्यापक, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), कंपनियां, सामाजिक संस्थाएं तथा शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। समाज के सामने मौजूद समस्याओं की पहचान कर उनके लिए प्रौद्योगिकी आधारित और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए यह प्रतियोगिता एक महत्वपूर्ण अवसर है। वर्तमान में महाराष्ट्र जोन से प्रतियोगिता में भाग लेने वालों की संख्या 65 हजार से अधिक हो गई है। 30 अक्टूबर तक इस संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।

कृषि, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण और परिवहन जैसे दैनिक जीवन से जुड़े मुद्दों पर विद्यार्थियों को व्यावहारिक समाधान सुझाने का आह्वान भी किया गया है। स्वयंसेवी संस्थाएं विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं की पहचान करने से लेकर समाधान विकसित करने और प्रतियोगिता के लिए आवेदन प्रस्तुत करने तक मार्गदर्शन दें। साथ ही, अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों की संख्या, विद्यार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य, जानकारी देने वाले विद्यार्थियों की संख्या और प्रस्तुत किए जाने वाले गुणवत्तापूर्ण आवेदनों की संख्या के संबंध में स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान भी किया गया है।

कहाँ करें आवेदन?

जमीनी स्तर के विद्यार्थियों के विचारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए शासन, विद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं को समन्वय के साथ काम करना आवश्यक है, ऐसा मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक उम्मीदवार https://sevainnovationchallenge.in/ वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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वापी,

मान्या एनजीओ द्वारा सेवा और सामाजिक सरोकार की दिशा में एक और सराहनीय पहल करते हुए जरूरतमंद विद्यार्थी रोशन विश्वकर्मा की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई गई है। संस्था ने बच्चे की स्कूल फीस जमा करवाने के साथ-साथ उसके परिवार को राशन किट भी प्रदान की, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार को राहत मिल सके और बच्चे की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यार्थी रोशन विश्वकर्मा के पिता श्री विनोद विश्वकर्मा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। बीमारी के चलते उनकी जीभ काटनी पड़ी है। इस कठिन परिस्थिति में परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है और परिवार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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परिवार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मान्या एनजीओ ने आगे आकर रोशन की स्कूल फीस जमा करवाई तथा परिवार को राशन किट उपलब्ध कराई। संस्था की इस पहल से परिवार को आर्थिक सहायता मिलने के साथ ही बच्चे की शिक्षा जारी रखने में मदद मिलेगी।

मान्या एनजीओ का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई न रुके और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। संस्था लगातार जरूरतमंद परिवारों की सहायता करने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत है।

चंदौली,

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के धानापुर क्षेत्र स्थित ओदरा में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज की श्रीराम कथा का आयोजन चल रहा है। भाजपा विधायक सुशील सिंह के सानिध्य में आयोजित इस कथा में शामिल होने पहुंचे जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने रामकथा के आयोजनों और प्रदेश की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया।

धनंजय सिंह ने कहा कि रामकथा के आयोजन पहले भी होते थे, लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इनमें बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हो रहे हैं। कथा में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग भी एक साथ बैठकर रामकथा सुन रहे हैं।

योगी सरकार को लेकर क्या बोले धनंजय सिंह?

उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार के भविष्य को लेकर धनंजय सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार आगे भी बनी रहेगी और इसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। उनके इस बयान को प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अहम माना जा रहा है।

श्रीराम कथा के मंच से दिए गए धनंजय सिंह के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और धार्मिक आयोजनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे से जुड़े कथित ₹500 करोड़ के लेनदेन और ऑडियो क्लिप विवाद ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को SIT गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं।

विवाद एक कथित ऑडियो क्लिप के बाद शुरू हुआ, जिसमें जरांगे को ₹500 करोड़ दिए जाने का दावा किया गया था। जरांगे ने इन आरोपों से इनकार किया है। वहीं, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने अमित शाह को पत्र लिखकर ED जांच की मांग की है और सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसका इस्तेमाल कहां हुआ। बीजेपी ने क्लिप को AI से बनाई गई फर्जी ऑडियो बताया, जबकि राउत ने दावा किया कि इसे बीजेपी के एक विधान परिषद सदस्य ने लीक किया। अब SIT जांच से इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आपत्तिजनक बयान देना देश का अपमान है

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जा. न्यूज़ संवाददाता

मुंबई।  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में दिए गए आपत्तिजनक बयान की कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कड़े शब्दों में निंदा की है। खरगे अपने बयान के लिए देश से माफी मांगें, ऐसी मांग मंत्री लोढ़ा ने की।

इस संबंध में कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि विनाशकाले विपरीत बुद्धि। इससे पहले राहुल गांधी छोटे बच्चों की तरह व्यवहार कर रहे थे। मल्लिकार्जुन खरगे ने जो बयान दिया, उससे उनकी बुद्धि कितनी है, यह दिखाई दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक महान व्यक्तित्व हैं और उनके बारे में इस तरह का बयान देना किसी को भी शोभा नहीं देता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आपत्तिजनक बयान देना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश का अपमान है, ऐसा मंत्री लोढ़ा ने कहा। खरगे अपने बयान के लिए देश से माफी मांगें। अन्यथा जनता उन्हें माफ नहीं करेगी, ऐसी चेतावनी भी मंत्री लोढ़ा ने दी।

मुंबई में वायु गुणवत्ता को लेकर महानगरपालिका प्रशासन सतर्क 

मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि मुंबई में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। इस पृष्ठभूमि में महानगरपालिका प्रशासन इस पर गंभीरता से ध्यान दे रहा है। मौसम में बदलाव के दौरान वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे विभिन्न समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक उपाय किए जाएंगे।

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वापी,

वापी महानगरपालिका और गुजरात आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में वापी के अजीतनगर, चला क्षेत्र में ‘स्वदेशी मेला (शॉपिंग फेस्टिवल)’ का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला 28 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक चलेगा। दस दिवसीय इस मेले का समय प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक रहेगा। मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

गुजरात सरकार के वित्त मंत्री तथा शहरी विकास एवं शहरी आवास मंत्री श्री कनुभाई देसाई के मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, कलाकारों, स्वयं सहायता समूहों (SHG), छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापारियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।

77 स्टॉल और 12 फूड स्टॉल होंगे आकर्षण

पिछले वर्ष मिले उत्साहजनक प्रतिसाद को देखते हुए इस बार स्वदेशी मेले को और व्यापक स्वरूप दिया गया है। मेले में कुल 77 स्टॉल और 12 फूड स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां नागरिकों को स्थानीय हस्तकला, कलात्मक वस्तुओं, स्वदेशी उत्पादों और विभिन्न प्रकार के खाद्य व्यंजनों की खरीदारी का अवसर मिलेगा।

इसके साथ ही छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न राइड्स और खेल गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। आज के समय में धीरे-धीरे विलुप्त हो रही पारंपरिक देशी खेलों को भी मेले में शामिल किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मनोरंजन की गतिविधियों से मेले में आने वाले नागरिकों को विशेष अनुभव मिलेगा।

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा बढ़ावा

स्वदेशी मेले का प्रमुख उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’, ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों को प्रोत्साहित करना है। इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के साथ स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह मेला स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने तथा स्वदेशी उत्पादों के प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

महानगरपालिका आयुक्त ने नागरिकों से की अपील

वापी महानगरपालिका के म्युनिसिपल कमिश्नर श्री एन. एफ. चौधरी (IAS) ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से शहरवासियों से स्वदेशी मेले में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

उन्होंने नागरिकों से स्थानीय कारीगरों, कलाकारों, स्वयं सहायता समूहों और व्यापारियों को प्रोत्साहित करने तथा स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। उन्होंने ‘स्वदेशी अपनाओ, स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन दो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाओ’ के संदेश को सार्थक करने तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।